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Friday, January 8, 2021

 पगडण्डी 

एक छोटे से गाँव में भोलू नाम का एक गधा रहता था। वह गाँव बाकी दुनिया से बिलकुल कटा हुआ था, न वहां कोई आता था और न वहां से कोई कहीं जाता था।

एक बार गधे ने सोचा क्यों ना जंगल के उस पार जाकर देखा जाए कि आखिर उस तरफ है क्या?

अगले दिन भोर में ही वह जंगल की ओर बढ़ चला।

जंगल घना था और गधा मूर्ख। बिना सोचे समझे उसे जिधर मन करता उधर चल पड़ता। जैसे-तैसे करके उसने जंगल पार किया और दूसरी छोर पर स्थित एक और गाँव पहुँच गया।

उधर गाँव में हल्ला मच गया कि भोलू गधा गाँव छोड़ कर चला गया है, सब बात करने लगे कि वो कितना भाग्यशाली है, और अब कितनी आराम की ज़िन्दगी जी रहा होगा। लोगों की बात सुनकर कुत्तों  के एक झुण्ड ने भी जंगल पार करने का निश्चय किया।

अगली सुबह वह गधे की गंध का पीछा करते हुए उसी रास्ते से जंगल के उस पार चले गए।

फिर क्या था, गाँव के अन्य पशुओं में भी जंगल पार करने की होड़ सी लग गयी और सभी गधे द्वारा खोजे गए रास्ते पर चलते हुए जंगल पार करने लगे।

बार-बार उस रास्ते पर चलने से एक पगडण्डी सी बन गयी और कुछ सालों बाद इंसान भी उसी रास्ते को पकड़ कर जंगल पार करने लगे । समय बीतता गया और धीरे-धीरे  गाँव की आबादी काफी बढ़ गयी। तब सरकार ने जंगल पार करने के लिए एक रोड बनाने का निर्णय लिया गया।

शहर से इंजीनियरों का एक दल आया और इलाके की स्टडी करने लगा।

गाँव वालों ने बताया कि जंगल पार करने के लिए एक पगडण्डी बनी हुई है उसी पर अगर रोड बना दी जाए तो अच्छा रहेगा।

उनकी बात सुनकर चीफ इंजीनियर थोडा मुस्कुराया और बोला, “ क्या मैं जान सकता हूँ ये पगडण्डी किसने बनायी ?”

गाँव के एक बुजुर्ग बोले, “जहाँ तक मुझे पता है ये रास्ता किसी गधे ने खोजा था !”, और उसने पूरी कहानी कह सुनाई ।

उनकी बात सुनने के बाद चीफ इंजीनियर बोले, “मुझे यकीन नहीं होता कि आप सब इंसान होंते हुए भी इतने सालों से एक गधे के बनाये रास्ते पर चल रहे थे…पता है ये रास्ता कितना कठिन और लम्बा है जबकि हमने जो रास्ता खोजा है वो इसका एक चौथाई भी नहीं है और उसे पार करना भी कहीं आसान है। ”

आज गाँव वालों को अपनी गलती का एहसास हो रहा था, वे सोच रहे थे कि काश उन्होंने एक नया रास्ता खोजने का प्रयास किया होता!

मित्रों, जो गलती उन गाँव वालों ने की कहीं वही गलती हम भी तो नहीं कर रहे हैं? कहीं हम किसी गधे के दिखाए रास्ते पर चल कर अपना जीवन बर्वाद तो नहीं कर रहे हैं? क्या आज हम जो भी काम या पढाई कर रहे हैं वो हमारे अपने रूचि के मुताबिक है या बस समाज और घरवालों के दबाव में हम अपना रास्ता ढूँढने से हिचक रहे हैं? कहीं हमें भी अपना रास्ता खोजने की ज़रुरत तो नहीं?

अगर हमे एक मतलब भरा जीवन जीना है तो हमें इन प्रश्नों का उत्तर देना होगा, वरना उस इंजीनियर की तरह एक दिन हमें भी कोई मिलेगा और बताएगा कि हमने अपना पूरा जीवन एक गधे का रास्ता पकड़े-पकड़े बर्वाद कर दीया।

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