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Sunday, February 7, 2021

 महासागरीय जलधाराएं

एक निश्चित दिशा में बहुत अधिक दूरी तक महासागरीय जल की एक विशाल जल-राशि के प्रवाह को महासागरीय जलधारा कहते हैं ।

यह धारा दो प्रकार की होती है - गर्म जलधारा और ठंडी जलधारा।

गर्म जलधारा :- निम्न अक्षांशों में उष्ण-कटिबंधो से उच्च सम शीतोष्ण और उपध्रुवीय कटिबंधो की ओर बहने वाली जल- धाराओं को गर्म जलधारा कहते हैं ।

ये प्रायः भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर चलती है ।

इनके जल का तापमान मार्ग में आने वाले जल के तापमान से अधिक होता है । अतः यह धाराएं जिन क्षेत्रों में चलती है वहां का तापमान बढ़ा देती है।

ठंडी जलधारा :- उच्च अक्षांशों से निम्न अक्षांशों की ओर बहने वाली जलधारा को ठंडी जलधारा कहते हैं ।

ये प्रायः ध्रुवो से भूमध्य रेखा की ओर चलती है ।

इनके जल के तापमान रास्ते आने वाले जल के तापमान से कम होता है । अतः ये धाराएं जिन क्षेत्रों में चलती है ,वहां तापमान घटा देती है।

उत्तरी गोलार्ध की जलधाराएं अपने दाएं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध की जल धाराएं बाएं ओर प्रवाहित होती है यह कोरियालिस बल के प्रभाव से होता है।

महासागरीय जल धाराओं के संचरण की सामान्य व्यवस्था का एकमात्र प्रसिद्ध अपवाद हिंद महासागर के उत्तरी भाग में पाया जाता है । इस भाग में धाराओं के प्रवाह की दिशा मानसूनी पवन की दिशा के साथ बदल जाती है - गर्म जलधाराएं ठंडी सागर की ओर और ठंडी जलधाराएं गर्म सागर की ओर बहने लगती है।

प्रशांत महासागर की गर्म जलधाराए :-

उत्तरी विषुवत रेखीय जलधारा

कयूरोसियो की जलधारा।

उत्तरी प्रशांत जल - प्रवाह

अलास्का की जलधारा

एलनीनो जलधारा

सुशीमा की जलधारा

दक्षिण विषुवतरेखीय जलधारा

पूर्वी आस्ट्रेलिया की जलधारा

विपरीत विषुवतरेखीय जलधारा

प्रशांत महासागर की ठंडी जलधाराएं :- 

क्यूराइल विषुवत रेखीय जलधाराा

कैलिफोर्निया की जलधाराा

हम्बोल्ट या पेरूवियन की जलधाराा

अंटार्कटिका की जलधाराा

अटलांटिक महासागर की गर्म जल धाराएं :-

उत्तरी विषुवत रेखीय जलधारा

गल्फ स्ट्रीम जलधारा

फ्लोरिडा जल धारा

दक्षिणी विषुवत रेखीय जलधारा

ब्राजील जलधारा

विपरीत विषुवत रेखीय गिनी जलधारा

ईरमिंजर की जलधारा

अटलांटिक महासागर की ठंडी जलधाराएं :-

लेबराडोर की जलधारा

वेंगुला की जलधारा

कनारी जलधारा

पूर्वी ग्रीनलैंड की जलधारा

अंटार्कटिका की जलधारा

फ़ॉकलैंड की जलधारा

हिंद महासागर की गर्म एवं स्थाई जलधाराएं :-

अदक्षिण विषुवत रेखीय जलधारा

अमोजांबिक की जलधारा

अ अगुलहास की जलधारा

हिंद महासागर की ठंडी एवं स्थाई जलधाराएं :- 

पश्चिम ऑस्ट्रेलिया की जलधारा।

नोट :- हिंद महासागर की ग्रीष्मकालीन मानसून की जलधारा गर्म एवं परिवर्तनशील जलधारा है एवं शीतकालीन मानसून हवा ठंडी एवं परिवर्तनशील जलधारा है।

सारगैसो सागर :- उत्तरी अटलांटिक महासागर में 20°से40° उत्तरी अक्षांश तथा 35° से 75° पश्चिमी देशांतरो के मध्य चारों ओर प्रवाहित होने वाली जलधाराओं के मध्य स्थित शांत एवं स्थिर जल के क्षेत्र को सारगैसो सागर के नाम से जाना जाता है ।

यह गल्फ स्ट्रीम, कनारी तथा उत्तरी विषुवतीय धाराओं के चक्र बीच स्थित शांत जल क्षेत्र है । इसके तट पर मोटी समुद्री घास तैरती है । इस घास को पुर्तगाली भाषा में सारगैसम कहते हैं ,जिसके नाम पर ही इसका नाम सारगैसो सागर रखा गया है । सारगैसम जड़ विहीन घास है ।

सारगैसो सागर क्षेत्रफल लगभग 11000 वर्ग किलोमीटर है । यहां अटलांटिक की सर्वाधिक लवणता का तापमान मिलती है।

सारगैसो सागर को सर्वप्रथम स्पेन के नाविकों ने देखा था।

सारगैसो सागर को महासागरीय मरुस्थल के रुप में पहचाना जाता है।

न्यूफौलैंड के समीप ही गल्फस्ट्रीम एवं लेब्राडोर जलधारा मिलती है।

न्यूफाउंडलैंड पर ही समुद्री मछली पकड़ने का प्रसिद्ध स्थान ग्रैंड बैंक उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित है।

गर्म एवं ठंडी जलधारा जहां मिलती है वहां प्लेकटन नामक घास मिलती है। जिससे उस स्थान पर मत्स्य उद्योग अत्यधिक विकसित हुआ है।

जापान के निकट कयूरोसियो की गर्म जल धारा तथा अयोसियो की ठंडी जलधारा के जल के मिलने से वहां पर घना कुहासा छाया रहता है।

ज्वार-भाटा

ज्वार-भाटा वे तरंग हैं वे सागरीय तरंगे हैं, जो पृथ्वी, चाँद और सूर्य के आपस के आकर्षण से उत्पन्न होते हैं. जब समुद्री जल ऊपर आती है तो उसे “ज्वार” और जब नीचे आती है तो “भाटा” कहते हैं. चंद्रमा के आकर्षण शक्ति का पृथ्वी के सागरीय जल पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है.

चंद्रमा सूर्य से 2.6 लाख गुना छोटा है लेकिन सूर्य की तुलना में 380 गुना पृथ्वी के अधिक समीप है. फलतः चंद्रमा की ज्वार उत्पादन की क्षमता सूर्य की तुलना में 2.17 गुना अधिक है.

पृथ्वी का जो सतह है, surface है…वह अपने केंद्र की तुलना में चंद्रमा से लगभग 6400 km. निकट है. अतः पृथ्वी के उस भाग में जो चाँद के सामने होता है, आकर्षण अधिकतम होता है और ठीक उसके दूसरी ओर न्यूनतम.

इस आकर्षण के प्रभाव के कारण चंद्रमा के सामने स्थित जलमंडल का जल ऊपर उठ जाता है, जिसके फलस्वरूप वहाँ ज्वार आता है.

दो ज्वार वाले स्थानों के बीच का जल ज्वार की ओर खिंच जाने के कारण बीच में समुद्र का तल सामान्य से नीचे चले जाता है, जिससे वहाँ भाटा उत्पन्न होता है.

एक दिन में प्रत्येक स्थान पर सामान्यतः दो बार ज्वार एवं दो बार भाटा पृथ्वी की घूर्णन के कारण आता है.

ज्वार-भाटा के प्रकार

दीर्घ अथवा उच्च ज्वार (SPRING TIDE)- अमावस्या और पूर्णिमा के दिन सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों में एक सीध में होते होते हैं. इन तिथियों में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के संयुक्त प्रभाव के कारण ज्वार की ऊँचाई सामान्य ज्वार से 20% अधिक होती है. इसे वृहद् ज्वार या उच्च ज्वार कहते हैं.

लघु या निम्न ज्वार (NEAP TIDE)- शुक्ल या कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी को सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के केंद्र पर समकोण बनाते हैं. इस कारण सूर्य और चंद्रमा दोनों ही पृथ्वी के जल को भिन्न दिशाओं में आकर्षित करते हैं. फलतः इस समय उत्पन्न ज्वार औसत से 20% कम ऊँचे होते हैं. इसे लघु या निम्न ज्वार कहते हैं.

दैनिक ज्वार (DIURNAL TIDE)- स्थान पर दिन में केवल एक बार ज्वार-भाटा आता है, तो उसे दैनिक ज्वार-भाटा कहते हैं. दैनिक ज्वार 24 घंटे 52 मिनट के बाद आते हैं. मैक्सिको की खाड़ी और फिलीपाइन द्वीप समूह में दैनिक ज्वार आते हैं.

अर्द्ध-दैनिक ज्वार (SEMI-DIURNAL)- जब किसी स्थान पर दिन में दो बार (12 घंटे 26 मिनट में) ज्वार-भाटा आता है, तो इसे अर्द्ध-दैनिक ज्वार कहते हैं. ताहिती द्वीप और ब्रिटिश द्वीप समूह में अर्द्ध-दैनिक ज्वार आते हैं.

मिश्रित ज्वार (MIXED TIDE)- जब समुद्र में दैनिक और अर्द्ध दैनिक दोनों प्रकार के ज्वार-भाटा का अनुभव लेता है, तो उसे मिश्रित ज्वार-भाटा कहते हैं.

अयनवृत्तीय और विषुवत रेखीय ज्वार- चंद्रमा के झुकाव के कारण जब इसकी किरणें कर्क या मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं, जो उस समय आने-वाले ज्वार को अयनवृत्तीय कहते हैं. इस अवस्था में ज्वार और भाटे की ऊँचाई में असमानता होती है. जब चाँद की किरणें विषुवत रेखा पर लम्बवत पड़ती है तो उस समय जवार-भाटे की स्थिति में असमानता आ जाती है. ऐसी अवस्था में आने वाले ज्वार को विषुवत रेखीय ज्वार कहते हैं.

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